KotKhai

Kotkhai (कोटखाई-गौइर) :- जब भी मै अपने दोस्तों को ये बताती हु की में कोटखाई से हूं तो सब पूछते है की ये कैसा नाम है कोट-खाई तो चलिए आज मे आपको बताती हूं की कोटखाई का नाम कोटखाई केसे पड़ा। कोटखाई नाम यहाँ के राजा के महल की वजह से पड़ा जोकि एक चट्टान पर बना है। कोट मतलब ‘महल’ और खाई मतलब ‘ चट्टान से नदी की गहराई’ । महल के साथ गिरिगंगा नदी बहती है जोकि महल की काफी निचे है। मेरे एक दोस्त की जानकारी के अनुसार महल के अन्दर से एक रास्ता इस नदी को जाता है और महल के लोग उस रास्ते से नदी का पानी ले जाया करते थे। कोटखाई महल का निर्माण राजा ‘राना साहब’ के द्वारा किया गया था। महल का निर्माण तिबेतिन शैली में किया गया है और इसका छत “पैगोडा” शैली में बनाया गया है। महल मै देओदार की लकड़ी की नक्काशी की गयी है। इसे पहले कोटखाई को “गौइर” कहा जाता था। सेबों की वादियों के बीच बसा ये शहर हिमाचल के प्रसिद्ध तहसील में से एक है। कोटखाई तहसील मै चालीस ग़ाव आते है। हिमाचल प्रदेश की उन्नति मै कोटखाई तहसील का महत्वपूर्ण योगदान है क्योंकी यहाँ पर सेब का सबसे जयादा उत्पादन होता है। यहाँ पर “पहाड़ी” और “हिंदी” भाषा का उपयोग किया जाता है। तो दोस्तों ये है कहानी मेरे कोटखाई शहर की । फिर मिलेंगे एक नयी कहानी के साथ । आपकी दोस्त – प्रियंका चौहान।13391663_1025634080856135_3777301495294645418_o

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s